रविवार, 24 फ़रवरी 2013

वैशिवक आइने में आतंकवाद : वर्तमान परिदृश्य एवं भविष्य की चुनौतियां

वैशिवक आइने में आतंकवाद : वर्तमान परिदृश्य एवं भविष्य की चुनौतियां
डा0 प्रबल प्रताप सिंह तोमर
विभागाध्यक्ष वाणिज्य
       आर0 एस0 जी0 यू0 पी0 जी0 कालेज पुखरायां, कानपुर देहात          
        आतंकवाद एक ऐसा वाद है जिसके द्वारा लोगों के अंदर भय, हिंसा, आगजनी, विस्फोट, हाइजैक, अपहरण, साम्प्रदायिकता का पुट, क्षेत्रवाद आदि का समिमश्रण देखने को मिलता है। इसलिए इतना तो कहा ही जा सकता है कि आतंकवाद राजनीतिक उददेश्य से प्रेरित तीव्र हिंसा का प्रयोग है जिसके द्वारा व्यकितयों की, समाज की, देश की सम्पतित एवं जान को क्षति पहुंचती है। वह व्यकित या संगठन जो किसी लक्ष्य पर लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए हिंसक तरीकों का प्रयोग करके भय का वातावरण पैदा करता है, आतंकवादी कहलाता है। कहा जा सकता है कि राजनैतिक उददेश्यों की पूर्ति के लिए समाज के भीतर भय का वातावरण पैदा करने के इरादे से उठाया गया कदम अथवा हिंसक व्यवहार ही आतंकवाद कहलाता है। आतंकवाद पर अपनी तरह से समस्या को उठाकर इसका समाधान इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है।
      संपादक-डा.वीरेन्द्रसिंह यादव की यह पुस्तक पाच खण्डों में -आतंकवाद का वैशिवक परिदृश्य : स्वरूप एवं समस्याएंभारतीय परिदृश्य में आतंकवाद : चुनौतिया एवं समाधान की दिशाएं,आंतरिक] सुरक्षा के समक्ष प्रमुख चुनौती :आतंकवाद एवं नक्सलवाद के विशेष सन्दर्भ में,आतंकवाद के उन्मूलन में  साहित्य  एवं संगीत की भूमिका ,बदलते परिदृश्य में आतंकवाद के विविध मुखौटे नामक शीर्षकों में विभाजित है। इस पुस्तक में 39 विद्वानों के लेखों के माध्यम से आतंकवाद के  विभिन्न मिथकों को नये सिरे से परिभाषित किया गया है।
       डा0 वीरेन्द्र यादव का सम्पादकीय के माध्यम से कहना है कि यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक हो जाता है कि आतंक का अर्थ सदैव किसी की जान ले लेना, किसी को बम धमाकों से, हथियारों के द्वारा डराना ही नहीं होता वरन अपने किसी भी प्रकार के कृत्य से समाज में, व्यकित में भय का वातावरण पैदा कर देना भी आतंक की श्रेणी में आता है। आतंकवादी अपने आपमें निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु सभी प्रकार के हथकंडों का इस्तेमाल करते देखे गये हैं,इनमें बर्बर से बर्बर कदमों को भी समाहित किया जा सकता है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि आतंकवाद कोर्इ विचारधारा अथवा सिद्धान्त नहीं वरन एक प्रकि्रया अथवा एक उपकरण है जिसका प्रयोग कर कोर्इ भी राज्य, राजनीतिक संगठन, स्वतन्त्रावादी समूह, अलगाववादी संगठन, जातीय, धार्मिक, उन्मादी अपने उददेश्य को प्राप्त करते हैं।
                   इस पुस्तक के माध्यम से देश में लगातार बढ़ती आतंकी घटनाओं को देखते हुए आतंकवाद के विरुद्ध व्यापक रूप से जनआन्दोलन छेड़ने के साथ कड़े से कड़े कदम उठाये जाने बात कही गयी है। इसके माध्यम से यह भी अनुरोध करने की कोशिश की गयी है कि अपनी सम्पूर्ण एकजुटता के द्वारा ऐसे लोगों को चिनिहत करके बाहर लाना होगा जो किसी भी रूप में आतंकवादियों को संरक्षण प्रदान करते हैं। इनके विरुद्ध कठोर से कठारे कार्यवाही के द्वारा लोगों के भीतर इस संदेश को पहुंचाना होगा कि सरकार आतंकवाद और आतंकवादियों के विरुद्ध है तथा इन लोगों को किसी भी रूप में बख्शा नहीं जायेगा। डा0वीरेन्द्र यादव अनितम निष्कर्ष के रूप में कहते हैं कि दरअसल ऐसा भी नहीं है कि आतंकवाद से निपटा नहीं जा सकता हो। भले ही आतंकवादियों ने अब नर्इ-नर्इ तकनीकी का, नये-नये औजारों का, विकसित हथियारों का प्रयोग करना शुरू कर दिया हो किन्तु यह भी सत्य है कि किसी भी देश के पास भी ये सारी अत्याधुनिक तकनीक मौजूद रहती हैं, आवश्यकता तो होती है बस आत्मनिर्णय लेने की, बुलंद हौसलों की। इसका उदाहरण देखना हो तो आसानी से अमेरिका को देखा जा सकता है। जहां 911 के हमले के बाद से किसी प्रकार की बड़ी आतंकी घटना नहीं हुर्इ है। अमेरिका सरकार ने अपने कानूनों को अत्यधिक सख्त कर रखा है और इस पर वह किसी हीलाहवाली के कार्यवाही भी करता दिखता है। उसने अपने देश के आर्इ0 टी0 कानून में व्यापक स्तर का बदलाव करके स्वयं को आतंकवाद के विरुद्ध तैयार कर रखा है।      
          विश्व में आतंक का स्तर बहुत ही हार्इटैक हो चुका है। अमेरिका में हुआ हमला और इसके अलावा अन्य दूसरे पशिचमी देशों में बम धमाकों की घटनाओं ने साफ तौर पर बता दिया है कि अब आतंकवादी सिर्फ छोटे-मोटे हथियारों की मदद नहीं लेते हैं और न ही उनके पास आज सिर्फ भाड़े के व्यकित हैं,वे तो अब प्रोफेशनल लोगों की,इंजीनियर्स की मदद लेते हैं और बदले में उनको बहुत बड़ी धनराशि अदा भी की जाती है। इस बात के सबूत हमें मुम्बर्इ के 2611 के हमले, गुजरात के बम धमाकों के बाद से आसानी से मिले हैं।  आतंकवाद का हौसला और इन आतंकवादियों की कारस्तानियां इस हद तक बढ़ चुकी हैं कि अब ये खुलेआम सरकार को चुनौती सी देते दिखते हैं। भारतीय संसद पर हमला इसी बात का जीता-जागता उदाहरण है। देश के सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले क्षेत्र में घुसकर हमला करने की नीति किसी भी रूप में कम नहीं कही जा सकती है।
         आतंकवाद अपने आपमें निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु सभी प्रकार के हथकंडों का इस्तेमाल करते देखे गये हैं, इनमें बर्बर से बर्बर कदमों को भी समाहित किया जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक के माध्यम से डा0 वीरेन्द्र यादव ने विश्व में फैले आतंकवाद के जाल को रेखांकित कर इसका समाधान भी सुझाने की सफल कोशिश की है। जागरूक पाठकों को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।
पुस्तक का नाम- वैशिवक आइने में आतंकवाद : वर्तमान परिदृश्य एवं भविष्य की चुनौतियां
संपादक-डा.वीरेन्द्रसिंह यादव
पेज-18+291-309
ISSN.978.81.8455.320.8
संस्करण-प्रथम.2011,मूल्य-795.00
ओमेगा पबिलकेशन्स,4378/एळ4एजे.एम.डी.हाउस,मुरारी लाल स्ट्रीट,अंसारी रोड, दरियागंज, नर्इ दिल्ली-110002

 

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